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किसान बस अपनी जिंदगी काट रहे है और दूसरों की जिंदगी बना रहे है।

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शहरों में लोग पैसा कमा रहे है, मगर क्या वो उन पैसों से पेट भर पा रहे है। अरे सही मायने में जानना है तो पूछो उस किसान से जो तपती धूप, बेमौसम बारिश और कड़कड़ाती ठण्डी में भी वो हम लोगो के लिए अनाज उगा रहे है। उन्हें मोह नही है पैसों का बस वो पेट भरने के लिए कमा रहे है। उस किसान की कोई नही पूछता बस यहां वोट बैंक की राजनीति चला रहे है। जो अच्छे बड़ो बड़ो का पेट भरने के लिए खेतो में हल चला रहे है, और वो बड़े बड़े लोगो के साथ दावत हुड़ा रहे है। किसान की हालत कोई नही समझता क्या बीतती है उस किसान पर जब उसकी उम्मीद टूट जाती है मौसम या किसी तोफान से पैसे कमाने वाले मार्केट में लोग अपना स्वार्थ देखकर मोल भाव लगा रहे है, मगर वो पेट भरने वाले मार्केट में निःस्वार्थ बिना मोल भाव किये अपना अनाज बेच कर आ रहे है। ओर मिलता क्या सिर्फ पेट भर रोटी मगर उसमे भी वो खुश रहते है और अपना जीवन चला लेते है। में कभी कभी सोचता हूं कि हर व्यक्ति अगर शहर आकर काम करने लगेगा तो क्या इंसान अपना पेट भर सकेगा। देश मे आपदा आती है या किसी के जीवन मे आपदा आती है तो सरकार के साथ साथ बड़े बड़े रहीश लोगों के शर्म से मदद के ह...

पिता के पैसे

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सच है यार शोक तो सारे पूरे पिता के पैसे से ही हुये है, जो हम कमा रहे है उससे तो सिर्फ जिंदगी चल रही है। वो जब बचपन में पिता के थोड़े पैसे मिलते थे, तब चेहरे की मुश्कान बताया करती थी कि कितनी खुशी हुआ करती थी, अब हम उस पैसे से कई ज्यादा कमा लेते है मगर वो खुशी खोज नही पाते है। वो पिता अपने खून पसीने का कतरा कतरा गवा कर पैसे कमा कर लाता था और हम उस पैसे को खुशी खुशी गवा दिया करते थे, अब हम खुद के पैसे कमाने पर भी वो नही कर पाते है जो पिता के पैसे से कर जाते थे। हर चीज हर खुशी खरीद लिया करते थे, पिता के पैसे का मोल हम कभी नही चुका सकते है। हमे कामयाब बनाने के लिए कितने कष्ट से गुजर पाया है, वो खुद पिता के अलावा और कोई नही जान पाया है। कहते है कि गुरु सीखाता है तो वह गुरुदक्षणा भी लेता है, पर गौर कीजिए कि पिता जो सीखाता है उसका मोल कोई चुकता है। ना वो गुरु है न वो ज्ञानी है, मगर हमे जिंदगी में सबसे ज्यादा वही सीखाता है, शायद वो तुमसे ज्यादा तुमको जानते है तभी तो वह तुम्हारी कामयाबी में सबसे ज्यादा खिलखिलाता है। कतरा-कतरा खून का बूंद-बूंद पसीने की हर मौसम में उसने गवाया है, क्या ...

बच्चे सबसे अच्छे ओर सबके अच्छे

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बच्चे सबसे अच्छे ओर सबके अच्छे, बस गुजारिश है और कुछ नही उन्हें माहौल अच्छा दे देना। जिंदगी उनकी संवारने के लिए डर और डराने की बात मत कहना उन्हें बस अच्छे माहौल में पलने देना। नकारात्मक विचारों की परछाई से दूर उन्हें रखना कभी गलत परछाई तक पुहचने मत देना। बच्चे सबसे अच्छे और सबके अच्छे, चाहें माता पिता उतने न हो जागरूक मगर बच्चों को जागरूक माहौल में ही रहने देना। बच्चे जो बचपन मे सुनते है देखते है वही असर उनके जीवन पर होता है यह बात तुम समझ लेना। गुजारिश है हमारी की अच्छे भविष्य के लिए बच्चों को अच्छे माहौल में ही रहने देना। न पढ़ाई और न पढ़ने पर तुम चाहें उतना ध्यान न देना। बस किस माहौल में रह रहे है वो उस बात का ध्यान रख लेना। बच्चे सबसे अच्छे और सबके अच्छे, बस गुजारिश है माहौल अच्छा दे देना।