किसान बस अपनी जिंदगी काट रहे है और दूसरों की जिंदगी बना रहे है।
शहरों में लोग पैसा कमा रहे है, मगर क्या वो उन पैसों से पेट भर पा रहे है। अरे सही मायने में जानना है तो पूछो उस किसान से जो तपती धूप, बेमौसम बारिश और कड़कड़ाती ठण्डी में भी वो हम लोगो के लिए अनाज उगा रहे है। उन्हें मोह नही है पैसों का बस वो पेट भरने के लिए कमा रहे है। उस किसान की कोई नही पूछता बस यहां वोट बैंक की राजनीति चला रहे है। जो अच्छे बड़ो बड़ो का पेट भरने के लिए खेतो में हल चला रहे है, और वो बड़े बड़े लोगो के साथ दावत हुड़ा रहे है। किसान की हालत कोई नही समझता क्या बीतती है उस किसान पर जब उसकी उम्मीद टूट जाती है मौसम या किसी तोफान से पैसे कमाने वाले मार्केट में लोग अपना स्वार्थ देखकर मोल भाव लगा रहे है, मगर वो पेट भरने वाले मार्केट में निःस्वार्थ बिना मोल भाव किये अपना अनाज बेच कर आ रहे है। ओर मिलता क्या सिर्फ पेट भर रोटी मगर उसमे भी वो खुश रहते है और अपना जीवन चला लेते है। में कभी कभी सोचता हूं कि हर व्यक्ति अगर शहर आकर काम करने लगेगा तो क्या इंसान अपना पेट भर सकेगा। देश मे आपदा आती है या किसी के जीवन मे आपदा आती है तो सरकार के साथ साथ बड़े बड़े रहीश लोगों के शर्म से मदद के ह...